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तहसीलदारों की अनिश्चितकालीन हड़ताल को मिला लिपिक संघ का पुरजोर समर्थन, प्रदेश सचिव मुकेश तिवारी बोले – “यह प्रशासनिक गरिमा की लड़ाई है”

17-सूत्रीय मांगों को बताया पूरी तरह न्यायोचित, शासन की चुप्पी पर उठाए गंभीर सवाल। आम जनता के नामांतरण, बंटवारा और प्रमाण पत्र जैसे सैकड़ों काम अटके, बढ़ सकती हैं मुश्किलें

रायपुर : प्रदेश में राजस्व प्रशासन की रीढ़ कहे जाने वाले तहसीलदार और नायब तहसीलदारों की अनिश्चितकालीन हड़ताल ने आज और भी बड़ा रूप ले लिया है। अपनी 17-सूत्रीय मांगों को लेकर हड़ताल पर गए ‘छत्तीसगढ़ कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ’ को अब ‘छत्तीसगढ़ प्रदेश राजस्व लिपिक संघ’ का खुला और पूर्ण नैतिक समर्थन मिल गया है। लिपिक संघ के प्रदेश सचिव श्री मुकेश कुमार तिवारी ने कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ को एक आधिकारिक पत्र जारी कर न केवल उनके आंदोलन को जायज ठहराया, बल्कि शासन की संवादहीनता पर गहरा खेद भी व्यक्त किया है।

समर्थन पत्र में दिखी एकजुटता, शासन के रवैये पर सवाल :

लिपिक संघ द्वारा जारी पत्र केवल एक औपचारिक समर्थन नहीं, बल्कि शासन के प्रति एक कड़ा संदेश भी है। पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ ने हड़ताल पर जाने से पूर्व 17 जुलाई को ज्ञापन सौंपने से लेकर 28 से 30 जुलाई तक चरणबद्ध आंदोलन कर शासन को संवाद के लिए पर्याप्त समय और अवसर दिया था। इसके बावजूद शासन स्तर पर किसी भी प्रकार की सकारात्मक पहल न होना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।

इस मौके पर प्रदेश सचिव श्री मुकेश कुमार तिवारी ने कहा, “यह केवल कुछ मांगों की लड़ाई नहीं, बल्कि यह கள में दिन-रात काम करने वाले अधिकारियों की प्रशासनिक गरिमा और सुरक्षा की लड़ाई है। जब एक तहसीलदार या नायब तहसीलदार बिना पर्याप्त सुरक्षा और संसाधनों के न्यायिक कार्य करता है, तो उस पर हमेशा एक मानसिक दबाव बना रहता है। उनकी मांगें सौ प्रतिशत तर्कसंगत हैं। छत्तीसगढ़ प्रदेश राजस्व लिपिक संघ इस लड़ाई में पूरी दृढ़ता से उनके साथ खड़ा है।”

क्या हैं प्रमुख मांगें और क्यों ठप्प हुआ काम?

कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ की मांगों में मुख्य रूप से शामिल हैं: प्रशासनिक एवं तकनीकी संसाधन: आधुनिक कार्यालय, वाहन और अन्य तकनीकी उपकरणों की उपलब्धता।

न्यायिक कार्यों में संरक्षण: न्यायिक निर्णय लेने पर अधिकारियों को अनावश्यक कानूनी उत्पीड़न से बचाने के लिए संरक्षण अधिनियम (Protection Act) लागू करना।

सुरक्षा: फील्ड में सीमांकन, अतिक्रमण हटाने जैसी जोखिम भरी कार्यवाहियों के दौरान पर्याप्त पुलिस बल की उपलब्धता।

कार्य संतुलन एवं सेवा शर्तें: बढ़ते कार्यबोझ को कम करना और सेवा शर्तों में समय के अनुरूप सुधार करना।

इन अधिकारियों के हड़ताल पर जाने का सीधा असर आम आदमी पर पड़ रहा है। प्रदेश भर की तहसीलों में नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन, आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र बनवाने जैसे सैकड़ों काम पूरी तरह से ठप्प हो गए हैं। राजस्व न्यायालयों में तारीखें आगे बढ़ रही हैं, जिससे लोगों को न्याय के लिए और इंतजार करना पड़ेगा।

क्यों महत्वपूर्ण है लिपिक संघ का समर्थन?

राजस्व लिपिक संघ का यह समर्थन इसलिए भी अहम है क्योंकि लिपिक वर्ग ही तहसील कार्यालयों की बुनियाद होता है। उनका समर्थन यह दर्शाता है कि राजस्व विभाग के जमीनी स्तर के कर्मचारियों से लेकर मध्य-स्तर के अधिकारियों तक में मांगों को लेकर एक व्यापक सहमति और व्यवस्था के प्रति असंतोष है। इस एकजुटता ने शासन पर नैतिक और प्रशासनिक दबाव काफी बढ़ा दिया है।

आगे क्या?

अब गेंद पूरी तरह शासन के पाले में है। एक तरफ हड़ताल के कारण आम जनता की बढ़ती परेशानियां हैं, तो दूसरी तरफ विभाग के भीतर बढ़ता समर्थन। यदि शासन जल्द ही संघ के पदाधिकारियों से वार्ता कर कोई सम्मानजनक समाधान नहीं निकालता, तो यह गतिरोध और लंबा खिंच सकता है, जिससे प्रदेश की राजस्व व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ना तय है।

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