

महासमुंद/सरायपाली। शिक्षक ही मानव जीवन में एक ऐसा दीप जला देता जो जीवन अंधकार मुक्त हो जाता है, आज 05 सितम्बर शिक्षक दिवस के अवसर पर गुरुजी ध्यान केन्द्र सरायपाली में परम पूज्य गुरुजी माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर जी के चित्र से आशीर्वाद लेकर ऐसे शिक्षकों को जिन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में एक मिशाल के रुप में कार्य किया, उनका सदैव उद्देश्य शिक्षा दान रहा, अपने आप को मोह, माया, लालच कोसों दूर रखकर समाज को स्वयं का समर्पित कर दिया, इन शिक्षकों के घर जाकर एम डी एजुकेशन सोसायटी सरायपाली ने व्दारा सम्मानित किया, यह कार्यक्रम समाज में एक प्रेरणादायक हो सकती है क्योंकि ऐसे अनेकों उम्रदराज शिक्षक हैं जिन्होंने समाज को अशिक्षा के दल-दल से निकलने में अपना सब कुछ समर्पित कर दिया और वह आज एक वैभव, ऐश्वर्य का नहीं बल्कि सम्मान की जीवन यापन कर रहे हैं, डॉ अनिल प्रधान ने बताया कि जिन शिक्षकों ने हमें पढ़ाकर इस मुकाम तक पहुंचाया उन शिक्षकों को हमें नहीं भुलना चाहिए, उनका मनोबल नहीं गिरने देना चाहिए, समय-समय में उनके सम-विषम परिस्थितियों में उनके साथ खड़ा होना चाहिए, इसी संदर्भ पुरूषोत्तम प्रधान ने बताया कि मानव समाज में शिक्षक की भूमिका अमूल्य है जिसका मूल्य चुकाना असंभव है, यह तो हमारे व्दारा प्रोत्साहित करने का एक छोटा सा प्रयास है एवं साथ-साथ प्रेरणादायक संदेश भी है ताकि राष्ट्र का प्रत्येक व्यक्ति गुरुओं के प्रति अपनी कृतज्ञता भाव जीवित रखें, महेन्द्र प्रसायत ने गुरु की वंदना श्लोक गाकर इस कार्यक्रम की शुरुआत किया एवं बताया कि समस्याओं में जीवन भरा पड़ा फिर भी समाज के उत्थान के लिए अपना तन-मन-धन निकालना ही पड़ता है, नरेंद्र मांझी के अनुसार शिक्षकों का सदैव प्रयास रहना चाहिए कि समाज के अंतिम पायदान में खड़े व्यक्ति भी शिक्षा के अधिकार से वंचित न हो, इस कार्यक्रम प्रारंभ एम डी एजुकेशन सोसायटी सरायपाली के व्दारा किया गया तथा कार्यक्रम में सफल संचालन करने के लिए मुख्य रुप में महेन्द्र पसायत, पुरुषोत्तम प्रधान, नरेंद्र मांझी, उसत बगर्ती, डॉ अनिल प्रधान मुख्य रूप से शामिल हुए।




