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छत्तीसगढ़ महिला आयोग में अनियमितता का साया

आयोग की गोपनीयता भंग, विश्वसनीयता ध्वस्त, सदस्यों के सुनवाई बहिष्कार से मचा हड़कंप

छत्तीसगढ़/रायपुर : छत्तीसगढ़ महिला आयोग, जिसे महिलाओं के अधिकारों की रक्षा और उनके लिए न्याय का प्रतीक बनना था, आज स्वयं ही अनियमितताओं, कदाचार और विश्वासघात के गहरे दलदल में फंस गया है। आयोग के अध्यक्ष और सचिव पर लगे संगीन आरोपों ने इसकी कार्यप्रणाली को न सिर्फ कटघरे में ला खड़ा किया है, बल्कि इसकी गोपनीयता और विश्वसनीयता को पूरी तरह से तहस-नहस कर दिया है। महिला आयोग के अध्यक्ष के पति और निजी व्यक्ति/बाहरी व्यक्ति (अनाधिकृत व्यक्तियों) द्वारा संवेदनशील मामलों में सेंधमारी और गोपनीय जानकारी के दुरुपयोग ने आयोग की नींव को हिला दिया है।

महिला आयोग के सदस्यों ने बताया कि दिनांक 21 जुलाई को सचिव के नाम एक लिखित पत्र जारी कर महिला आयोग में उपयोग में लिये जा रहे शासकीय वाहन का डीजल/पेट्रोल एवं अन्य होने वाले अन्य व्यय का पिछले वित्तीय वर्ष का ब्यौरा मांगा गया था परंतु अनियमितता उजागर होने के डर से महिला आयोग के अध्यक्ष श्रीमती किरणमयी नायक के दवाब के डर से सचिव द्वारा अभी तक कोई भी जानकारी नही दिया गया है और न ही इस संबंध में माननीय सदस्यों को कोई पत्राचार किया गया है,महिला आयोग के सचिव का यह कृत्य गैरजिम्मेदारना और सिविल सेवा आचरण नियम 1956 के विरुद्ध है।

महिला आयोग एक संवैधानिक संस्था है किसी भी शासकीय कार्यालय, संवैधानिक संस्थाओं में प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और संबंधित राज्य के महामहिम राज्यपाल और मुख्यमंत्री का फोटो लगाया जाता है परंतु छत्तीसगढ़ देश का पहला ऐसा राज्य है जहाँ पर महिला आयोग के अध्यक्ष श्रीमती किरणमयी नायक के कक्ष में राहुल गांधी,सोनिया गांधी और भूपेश बघेल का फोटो लगाया गया है जबकि राहुल गांधी और सोनिया गांधी भारत के किसी भी संवैधानिक पद प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, राज्यपाल और मुख्यमंत्री जैसे पद पर नही है फिर भी उनका फ़ोटो शासकीय कार्यालय में लगाना अवैधानिक और लोकतंत्र का घुला उल्लंघन है।

साथ ही महिला आयोग की अध्यक्ष कक्ष में गढ़बो नवा छत्तीसगढ़ का स्लोगन अथवा नारा लिखा हुआ है जो कि यह स्लोगन न तो छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग का स्लोगन है और न ही छत्तीसगढ़ शासन और प्रशासन का ऐसा कोई स्लोगन है,बल्कि यह तो कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष श्रीमान भूपेश बघेल द्वारा दिया गया स्लोगन है, इस तरह से भारत के संविधान का मजाक बनाया जा रहा है।

छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग के अध्यक्ष श्रीमती किरणमयी नायक और सचिव रमेश साहू को आयोग में अनाधिकृत व्यक्तियों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाये जाने हेतु कई बार मौखिक और लिखित पत्र देकर अवगत कराया गया था परंतु अनाधिकृत अथवा बाहरी व्यक्तियों पर प्रतिबंध न लगाकर अध्यक्ष द्वारा अनाधिकृत व्यक्तियों(अध्यक्ष के पति श्रीमान नायक,अखिलेश भारद्वाज,चंद्रिका,सुषमा) को ही नोट शीट में उल्लेखित कर शासकीय कार्यों को सौपा जाता है। अध्यक्ष के प्रसय पर इन अनाधिकृत व्यक्तियों/बाहरी व्यक्तियों द्वारा कार्यालय में सक्रिय रूप से उपस्थित होकर कार्यालय में कार्यरत शासकीय अथवा अर्धशासकीय कर्मचारियों को गलत कार्यों के लिए दवाब अथवा शासकीय कार्य मे व्यवधान उत्पन्न किया जाता है एवं कार्यालयीन कार्यो में हस्तक्षेप और शासकीय दस्तावेजों अथवा केश फ़ाइल को प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित किया जाता है साथ ही पक्षकारों से अनुचित बातचीत व सुनवाई कक्ष में अनाधिकृत रूप से उपस्थित होकर शासकीय कार्यों मे दखल दिया जाता है। जिससे महिला आयोग की गोपनीयता और विश्वसनीयता प्रभावित हो रही है।

जिस नारी को समर्थ और सशक्त बनाने के लिए नारी सशक्तिकरण के लिए सरकार की अनेक प्रकल्प चलायी जा रही है वही आज महिला आयोग की तथाकथित सशक्त अध्यक्ष अपने कर्तव्यों के प्रति इतना असहाय है कि महिला आयोग के शासकीय कार्यों मे अपने पति का अनैतिक सहारा लिया जा रहा है और तो और सुनवाई के दौरान उनके पति के द्वारा अपनी अध्यक्ष पत्नि को प्रत्यक्ष सलाह और हस्तक्षेप करते हुए देखा जाता है।

बेमेतरा के ग्राम नरिगांव में दो सामाजिक बहिष्कार के प्रकरण में महिला आयोग के अध्यक्ष के निज सहायक अभय सोनवानी द्वारा दोनो आवेदको से 12500/-,,12500/- अथवा 25 हजार रुपये का लेन देन की लिखित शिकायत महिला आयोग में पेश किया है। गौर करने वाली बात है कि अपने नीच सचिव पर लगे आरोप को गलत साबित करने और अपने उस नीच सचिव को बचाने के लिए अध्यक्ष के द्वारा कूटरचना कर अपने निज सचिव के साथ दो अनाधिकृत काउंसलर को माननीय सदस्यों और सचिव के बिना जानकारी के नरिगांव भेजकर गोपनीय तरीके से अध्यक्ष के निज सचिव द्वारा आवेदको को डरा धमका कर सुनवाई किया गया है और सुनवाई के पश्चात बिना न्यायपीठ (जिसमे दो सदस्य अनिवार्यतः होते है) के अध्यक्ष द्वारा तथ्यों को छुपाते हुए बिना सदस्यों और सचिव को बताए फाइल प्रोसिडिंग कर मामले को रफा दफा कर दिया गया है।

इस तरह से ऐसे कई मामले देखने और सुनने को मिलेंगे जिसमे लेनदेन कर अनैतिक कार्य किया गया है।

छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग के ऐसे कृत्यों के कारण ही महिला आयोग के सदस्यों ने आज के सुनवाई से बहिष्कार कर दिया है, आगे महामहिम राज्यपाल और मुख्यमंत्री जी से मिल कर उचित कार्यवाही हेतु वस्तुस्थिति से अवगत कराया जायेगा साथ ही साथ प्रस्ताव लाकर अध्यक्ष के इस अन्याय पीठ को भंग कर न्याय पीठ का गठन भी किया जायेगा जिससे न्याय के लिए भटक रहे पीड़ितों को सही,समुचित और निःशुल्क न्याय मिल सके।

छत्तीसगढ़ महिला आयोग का यह संकट केवल एक प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि उन मूल्यों का अपमान है, जिनके लिए यह संस्था स्थापित की गई थी। महिलाओं के प्रति न्याय और सम्मान की प्रतिबद्धता को पुनर्जनन करने के लिए आयोग को अपनी कार्यप्रणाली में आमूल-चूल सुधार, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करनी होगी। यदि यह संस्था समय रहते कठोर कदम नहीं उठाती है तो न केवल इसकी साख हमेशा के लिए दागदार हो जाएगी, बल्कि यह उन महिलाओं के विश्वास को भी खो देगी, जो न्याय की बड़ी उम्मीद लेकर महिला आयोग आती है। अब समय है कि आयोग के अध्यक्ष और सचिव अपने कर्तव्यों का निर्वहन नीति,नियत और निष्ठा से निभाए और पारदर्शिता और विश्वसनीयता को पुनर्स्थापित करें अन्यथा इतिहास इसे एक ऐसी संस्था के रूप में याद रखेगा, जो अनैतिक कार्यों के कारण अपने ही बोझ तले दब गई।

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