खैरागढ़
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मजदूर के बेटे को मिला प्रदेश के सबसे बड़े विश्वविद्यालय से पीएच.डी. की उपाधि

खैरागढ़: जिला खैरागढ़ के ग्राम दामरी निवासी श्री उमराव टण्डन के सुपुत्र खेमचंद टण्डन को प्रदेश के सुख्यात पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय से पीएच.डी. की उपाधि प्रदान किया गया। डॉ. खेमचंद टण्डन ने पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर के भूगोल अध्ययनशाला से सहायक प्रध्यापक डॉ. टीके सिंह के निर्देशन में “छत्तीसगढ (भारत) के दुर्ग-राजनांदगाँव उच्चभूमि में जनजातियों की शैक्षिक गत्यात्मकता एक भौगोलिक विश्लेषण” विषय में शोध किया डॉ. खेमचंद ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पैतृक गांव दामरी, माध्यमिक व उच्चतर शिक्षा बढाईटोला एवं स्नातकोत्तर कि पढाई राजनांदगाँव स्थित प्रसिद्ध दिग्विजय कालेज से प्रथम श्रेणी के साथ उतीर्ण किया। स्नातकोत्तर की पढ़ाई प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण करने के बाद डॉ. खेमचंद ने अपने सपनों को उड़ान देते हुए पं. रविशंकर विश्वविद्यालय के भूगोल अध्ययनशाला में डॉ. टीके सिह के अधिनस्थ एम.फिल. कि उपाधि प्राप्त करने के बाद डॉ. टीके सिंह के अधिनस्थ ही पीएच.डी. शोध कार्य करते हुए डाक्टरेट की उपाधि प्राप्त किए।

डॉ. खेमचंद के लिए उच्च शिक्षा का राह इतना आसान नहीं था। अभावों में ही प्रतिभा की पहचान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता हौसलों से उड़ान होती है, इस पंक्ति को चरितार्थ करते हुए डॉ. खेमचंद ने अपनी गरीबी और अभावों को दरकिनार कर अपने लक्ष्य पर निगाह रखते हुए पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त किया। डॉ. खेमचंद ने इस उल्लेखनीय उपलब्धि का श्रेय अपने माता-पिता, अर्धांगिनी, भूगोल विभाग के समस्त गुरूजनों एवं मित्रों को दिया।

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