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’’इंद न मम’’ भाव के साथ 51 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ की पूर्णाहुति

श्रद्धालुओं से दक्षिणा में एक बुराई छोड़ने व नशामुक्त जीवन जीने का दिलाया संकल्प

महासमुंद/सरायपाली : अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज हरिद्वार के मार्गदर्शन में गायत्री परिवार ट्रस्ट सराईपाली द्वारा क्षेत्रवासियों के सहयोग से आयोजित 51 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ की पूर्णाहुति ’’इदं न मन’’ के भाव से लोककल्याण एवं जनकल्याण के भाव से हर्षोल्लास के साथ शनिवार को सम्पन्न हुई। गायत्री परिवार ट्रस्ट सराईपाली ने बताया कि गायत्री परिवार द्वारा इस प्रकार के आयोजन भारत के अनेक क्षेत्रों में किया जा रहा है। आयोजन का मुख्य उद्देश्य व्यक्ति निर्माण, परिवार निर्माण, समाज निर्माण एवं राष्ट्र को समर्थ व शक्तिशाली बानाने, आध्यात्मिक नवजागरण से सूक्ष्म जगत का शोधन, विश्व में शांति स्थापित करने एवं भारत को विश्वपटल पर पुनः जगद्गुरु के रुप में स्थापित करना है। गायत्री परिवार के संस्थापक युगदृष्टा आचार्य पंडित श्रीराम शर्मा जी आचार्य द्वारा चलाये गये सप्तसूत्रीय आंदोलन – साधना, शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वावलंबन, पर्यावरण संरक्षण, नारी जागरण, व्यसन मुक्ति एवं कुरीति उन्मूलन को जन-जन तक घर-घर पहुंचाना है।

मनुष्य जन्म बहुत भाग्य से मिलता है इसे व्यर्थ न गवांए

यज्ञ के दौरान यज्ञाचार्य  प्रमोद बारचे ने कर्मफल के सिद्धांत और महत्व को बताते हुए कहा कि हमें 84 लाख योनियों में भटकने के बाद मनुष्य जन्म प्राप्त होता है। हमें मनुष्य जीवन को व्यर्थ के कार्याें में नहीं गवाना चाहिए। हमे सत्संग करना चाहिये। भाग्यवान लोगों को ही सत्संग मिलता है। सत्संग में धर्म ग्रंथ की चर्चा, ऋषियो-मनीषियों, महापुरुषों के जीवन की चर्चा करनी चाहिये। इन सबने जो अनुभव लिखे हैं वे बड़े काम की हैं क्योंकि उन्होंने अपना पूरा जीवन लगाकर जो अनुभव प्राप्त किया वह हमको सत्संग के द्वारा केवल कुछ मिनटों में ही प्राप्त हो जाता है। सत्संग में हमको अच्छे वचार मिलते हैं अनुभव मिलते हैं और विचार ही हमको अच्दी दिशा देते हैं। हमें पद एवं प्रतिष्ठा की परवाह किये बिना सदैव सत्कार्य करते रहना चाहिए। प्रकृति ने हमें जो दिया, जितना दिया उसे ही स्वीकार करते हुए सदैवं प्रसन्न रहना चाहिए एवं अपने आस पास सकरात्मकता का दिव्य वातावरण उत्पन्न करना चाहिए।

निःशुल्क संस्कार का आयोजन

सराईपाली में आयोजित यज्ञ के दौरान निःशुल्क संस्कार भी किये गये। शांतिकुंज हरिद्वार से आए ऋषिपुत्र प्रमोद बारचे ने देव मंच से व्यक्ति के जीवन में विभिन्न संस्कारों के महत्व को बताया। आचार्यों ने बताया कि गायत्री मंत्र सबसे शक्तिशाली मंत्र है, जिसके जाप से माता गायत्री की कृपा प्राप्त होती है। इससे पापों से मुक्ति, मन की शांति और हृदय की मजबूती मिलती है। उन्होंने सभी को प्रतिदिन एक माला गायत्री मंत्र का जाप करने की सलाह दी। यज्ञ के दौरान 800 से अधिक महिलाओं ने पुंसवन संस्कार, 12 शिशुओं का अन्नप्राशन, 10 का मुण्डन, 100 बालकों का विद्यारंभ, 01 का कर्णछेदन, 05 का यज्ञोपवित एवं 100 से अधिक लोगों का दीक्षा संस्कार हुआ। साथ ही अनेकजनों का जन्मदिवस व विवाह दिवस संस्कार भी संपन्न हुआ।

पूर्णाहुति के लिये इंतजार में बैठे दिखे लोग

यज्ञ के अंतीम दिवस में यज्ञदेव को आहुति एवं पूर्णाहुति समर्पित करने के लिये सुबह से ही क्षेत्रवासियों का ताता लगा रहा एवं हजारों की संख्या में श्रद्धालुजन अपनी पारी के इंतजार में यज्ञ शाला के बाहर प्रतीक्षालय में बैठे दिखे। पूर्णाहुति का क्रम कई पालियों में संपन्न कराया गया और दोपहर 2 बजे अंतीम पूर्णाहुति दी गई। ऋषिपुत्र श्री बारचे ने बताया कि यज्ञ से व्यक्ति का जीवन महान बनता है। वह अपने जीवन में ऊंचाइयों को ग्रहण करता है।

पूर्णाहुति में दक्षिणा स्वरूप एक बुराई छोड़ने का दिलाया संकल्प

गायत्री महायज्ञ में पूर्णाहुति डालने के पहले अखिल विश्व गायत्री परिवार के संस्थापक आचार्य पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा नवयुग निर्माण के लिए लिखे गए सत् संकल्प का सामूहिक पाठ कराया गया और उसे जीवन व आचरण में उत्तारने का आह्वान किया। पूर्णाहुति में दक्षिणा स्वरूप एक बुराई छोड़ने एवं नशा मुक्त जीवन जीने का संकल्प दिलाया एवं प्रसाद स्वरुप हमारे ऋषियों एवं महापुरुषों के जीवन की कोई भी एक अच्छाई को ग्रहण करने की प्रेरणा दी गईं।

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