सरायपाली

भगवान राम का अपमान: शिक्षा विभाग की घोर लापरवाही से हिंदू आस्था को गहरी ठेस, सरायपाली के हिंदू संगठनों ने किया जिला शिक्षा अधिकारी का पुतला दहन 

सरायपाली : छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में शिक्षा विभाग की एक ऐसी करतूत सामने आई है, जिसने पूरे प्रदेश के हिंदू समाज को स्तब्ध और क्रोधित कर दिया है। सरकारी स्कूलों में कक्षा चौथी की अर्धवार्षिक अंग्रेजी परीक्षा के प्रश्नपत्र में एक सवाल ने भगवान श्रीराम की पवित्र आस्था को सीधी चुनौती दी है। प्रश्न था – “मोना के कुत्ते का नाम क्या है?” और इसके विकल्पों में एक विकल्प था ‘राम’! अन्य विकल्पों में ‘बाला’, ‘शेरू’ और ‘नो वन’ शामिल थे।

यह घटना मात्र एक ‘प्रिंटिंग त्रुटि’ नहीं, बल्कि हिंदू धर्म की भावनाओं पर सीधा प्रहार मानी जा रही है। सरायपाली विश्व हिंदू परिषद (विहिप), बजरंग दल और अन्य हिंदू संगठनों ने इसे सुनियोजित साजिश करार देते हुए जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) विजय कुमार लहरे का पुतला दहन कर अपना आक्रोश व्यक्त किया साथ ही सम्बंधित अधिकारी के खिलाफ तत्काल बर्खास्तगी और एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि ऐसे प्रश्न बच्चों के कोमल मन में धार्मिक आस्था के प्रति गलत संदेश पैदा करते हैं और यह शिक्षा विभाग की संवेदनहीनता का जीता-जागता प्रमाण है।

प्रदर्शनों की आग पूरे जिले महासमुंद में फैली विवाद सामने आते ही हिंदू संगठनों ने त्वरित प्रतिक्रिया दी। शुक्रवार को कार्यकर्ताओं ने सरायपाली शहर में रैली निकाली और पैदल मार्च करते जयस्तम चौक पहुंचे जहाँ उन्होंने डीईओ के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और डीईओ विजय कुमार लहरे का पुतला दहन किया गया। कार्यकर्ताओं ने “भगवान राम का अपमान बर्दाश्त नहीं” और “शिक्षा विभाग मुर्दाबाद” के नारे लगाए।

जिले के सभी पांच विकासखंडो सरायपाली, बसना, पिथौरा, बागबाहरा और महासमुंद – में हिंदू संगठनों ने एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन किए। हर ब्लॉक में डीईओ का पुतला फूंका गया और मुर्दाबाद के नारे लगाए गए। इसके अलावा, जिले के सभी थानों में शिकायत दर्ज कराते हुए ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें त्वरित एफआईआर और सख्त कार्रवाई की मांग की गई।

भगवान राम हिंदुओं के आराध्य हैं, उनके नाम को कुत्ते के साथ जोड़ना घोर अपमान है। जिम्मेदारों को जेल भेजा जाए और डीईओ को तुरंत बर्खास्त किया जाए।”

शिक्षा विभाग की सफाई: ‘प्रिंटिंग में त्रुटि’

विवाद बढ़ने पर डीईओ विजय कुमार लहरे ने सफाई दी कि मूल प्रश्नपत्र में ऐसा कोई प्रश्न नहीं था। प्रिंटिंग प्रेस में तकनीकी या मानवीय त्रुटि के कारण गलत प्रश्न जुड़ गया। उन्होंने खेद जताते हुए कहा कि भविष्य में ऐसी त्रुटि नहीं होगी और संबंधित वेंडर से स्पष्टीकरण मांगा गया है। हालांकि, हिंदू संगठनों ने इस सफाई को अस्वीकार कर दिया और इसे लीपापोती बताया।

प्रश्नपत्र तैयार करने की जिम्मेदारी समग्र शिक्षा की एपीसी सम्पा बोस को सौंपी गई थी, लेकिन विभाग के अंदर जिम्मेदारी की खींचतान भी सामने आ रही है।

पूरे प्रदेश में गूंजा मामला

यह घटना अब महासमुंद से निकलकर पूरे छत्तीसगढ़ में चर्चा का विषय बन गई है। सोशल मीडिया पर #रामआपमे का ट्रेंड कर रहे हैं। कई राजनीतिक दल भी इस पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं। हिंदू संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर त्वरित कार्रवाई नहीं हुई तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

शिक्षा विभाग के लिए यह एक बड़ा सबक है – बच्चों की किताबों और परीक्षाओं में धार्मिक संवेदनशीलता का पूरा ख्याल रखा जाना चाहिए। क्या यह मात्र लापरवाही थी या कुछ और? जांच से ही साफ होगा, लेकिन फिलहाल हिंदू समाज का आक्रोश शिक्षा विभाग के लिए झकझोर देने वाला है।

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