छत्तीसगढ़रायपुर

प्रोफेसर ऑफ प्रेक्टिस ने समाजविज्ञान के रिफ्रेशर कोर्स में व्याख्यान दिया

रायपुर:  पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर के मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान द्वारा आयोजित रिफ्रेशर कोर्स (सामाजिक विज्ञान ) में पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के प्रथम प्रोफेसर ऑफ प्रेक्टिस पद्मश्री जागेश्वर राम यादव जी के द्वारा बिरहोर जनजाति के सामाजिक आर्थिक स्थिति एवं समस्याओं पर आधारित व्याख्यान दिया गया। इस रिफ्रेशर कोर्स में देश के 10 राज्यों के 10 अलग अलग विषयों के 55 प्रतिभागी शामिल है।

यादव जी ने अपने वक्तव्य में बताया कि बिरहोर जनजाति छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा घोषित विशेष पिछड़ी जनजातियों में से एक है। यह जनजाति समाज के अत्यंत पिछड़े वर्ग में गिनी जाती है और आज भी आधुनिक विकास की मुख्यधारा से बहुत दूर है। उन्होंने कहा कि इनकी स्थिति अत्यधिक दयनीय है और इनकी आवश्यकताओं की ओर ध्यान दिया जाना अत्यंत आवश्यक है। यद्यपि सरकार ने कई जनजातियों को विशेष सुविधाएँ और लाभ प्रदान किए हैं, किंतु बिरहोर जनजाति अभी भी इन सुविधाओं से वंचित है। यादव जी ने बिरहोर जनजाति की कई मूलभूत समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित किया, जिनमें स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव, शिक्षा का निम्न स्तर, परिवहन के साधनों की अनुपलब्धता, और उचित खानपान की कमी प्रमुख हैं।

यादव जी ने प्रसिद्ध मानवशास्त्री वेरियर एल्विन का उद्धरण देते हुए कहा कि आदिवासी समाज का विकास केवल तभी संभव है जब उसे उसके जल, जंगल, और जमीन के साथ जोड़े रखा जाए। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज में संतुलित और समावेशी विकास लाने के लिए इस बात का ध्यान रखना आवश्यक है कि उनकी सांस्कृतिक, प्राकृतिक और पारंपरिक धरोहरों की रक्षा हो। इस संदर्भ में उन्होंने आदिवासी समाज को उनके पारंपरिक संसाधनों के साथ आत्मनिर्भर बनाने की आवश्यकता पर बल दिया और सुझाव दिया कि यह तभी संभव है जब नीति निर्माण में उनकी वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखा जाए।

यादव जी के व्याख्यान को सभी प्रतिभागियों ने सराहा, प्रतिभागियों ने इस व्याख्यान को इस संदर्भ में अभूतपूर्व बताया की जनजातियों के बीच कार्य करने वाले वास्तविक समाजसेवी के द्वारा किए गए कार्यों को सुनने का अवसर प्राप्त हुआ जो कि उच्च शिक्षण संस्थानों में बहुत ही कम दिखने को मिलता है। व्याख्यान का समापन माननीय कुलपति प्रो. सच्चिदानंद शुक्ल, HRDC के डायरेक्टर प्रो. प्रीति के.सुरेश, कोर्स कॉर्डिनेटर प्रो. एल. एस गजपाल तथा डॉ विजेंद्र पांडे के प्रति आभार के साथ समाप्त हुआ।

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