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बीएएमएस चिकित्सकों को “झोलाछाप” या “फर्जी डॉक्टर” कहना अनुचित : डॉ. प्रवीण कुमार साहू

विधिवत पंजीकृत आयुर्वेद चिकित्सकों की कानूनी मान्यता और पेशेवर गरिमा का सम्मान जरूरी

महासमुंद/सरायपाली । भारतीय चिकित्सा पद्धति के विधिवत शिक्षित एवं पंजीकृत चिकित्सकों को “झोलाछाप” अथवा “फर्जी डॉक्टर” कहे जाने के मामले को लेकर आयुर्वेद चिकित्सकों में नाराजगी सामने आ रही है। सरायपाली, जिला महासमुंद (छत्तीसगढ़) के बीएएमएस (BAMS) आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. प्रवीण कुमार साहू ने कहा कि किसी भी विधिवत मान्यता प्राप्त चिकित्सा शिक्षा प्राप्त एवं संबंधित राज्य परिषद में पंजीकृत चिकित्सक को उसकी चिकित्सा पद्धति के आधार पर अपमानजनक शब्दों से संबोधित करना उचित नहीं है।

डॉ. साहू ने कहा कि बीएएमएस कोई फर्जी अथवा गैर-मान्यता प्राप्त डिग्री नहीं है, बल्कि आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में मान्यता प्राप्त चिकित्सा योग्यता है। राष्ट्रीय चिकित्सा पद्धति आयोग (NCISM) अधिनियम, 2020 के तहत भारतीय चिकित्सा पद्धति के नियमन, शिक्षा, पंजीयन और पेशेवर मानकों की व्यवस्था की गई है। NCISM के आधिकारिक दस्तावेजों में भारतीय चिकित्सा पद्धति के चिकित्सकों के पंजीकरण एवं प्रैक्टिस से संबंधित प्रावधान मौजूद हैं।

“डिग्री मान्य है तो चिकित्सक को फर्जी कहना कैसे उचित?”

डॉ. प्रवीण कुमार साहू ने कहा कि किसी चिकित्सक की योग्यता और पंजीयन की स्थिति को देखे बिना उसे “झोलाछाप” या “फर्जी डॉक्टर” कहना न केवल उसकी व्यावसायिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि समाज में भ्रम की स्थिति भी पैदा करता है।

उन्होंने कहा, “बीएएमएस चिकित्सक ने निर्धारित पाठ्यक्रम के तहत चिकित्सा शिक्षा प्राप्त की है और यदि वह संबंधित प्राधिकरण में विधिवत पंजीकृत है, तो उसकी पहचान एक पंजीकृत आयुर्वेद चिकित्सक के रूप में होती है। ऐसे चिकित्सक को झोलाछाप या फर्जी डॉक्टर कहना पूरी आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति और उससे जुड़े चिकित्सकों का अपमान है।”

उन्होंने यह भी कहा कि चिकित्सा की विभिन्न पद्धतियों के लिए कानून और संबंधित नियामक संस्थाओं द्वारा अलग-अलग दायरे एवं अधिकार निर्धारित किए गए हैं। इसलिए किसी भी चिकित्सक के संबंध में टिप्पणी करने से पहले उसकी शैक्षणिक योग्यता, पंजीयन तथा विधिक अधिकारों की जानकारी होना आवश्यक है।

कानून और नियमों की जानकारी जरूरी

डॉ. साहू ने कहा कि NCISM Act, 2020 के लागू होने के बाद भारतीय चिकित्सा पद्धति के लिए राष्ट्रीय स्तर पर नियामक व्यवस्था स्थापित हुई है। NCISM की आधिकारिक वेबसाइट पर अधिनियम, नियम एवं विभिन्न विनियम उपलब्ध हैं तथा भारतीय चिकित्सा पद्धति के चिकित्सकों की शिक्षा और पेशेवर व्यवस्था को नियमन करने का प्रावधान है।

उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति अथवा संस्था किसी चिकित्सक की योग्यता, पंजीयन या उपचार संबंधी अधिकारों पर सवाल उठाती है, तो उसके लिए सक्षम विभाग अथवा संबंधित चिकित्सा परिषद से तथ्यात्मक जानकारी प्राप्त करना चाहिए, न कि बिना प्रमाण सार्वजनिक रूप से अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करना चाहिए।

आयुर्वेद चिकित्सकों की पेशेवर गरिमा का हो सम्मान

डॉ. प्रवीण कुमार साहू ने कहा कि आज बड़ी संख्या में लोग आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति पर भरोसा करते हैं। आयुर्वेद चिकित्सक भी अपनी निर्धारित शिक्षा, प्रशिक्षण और पंजीयन के आधार पर मरीजों को चिकित्सा सेवाएं प्रदान कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, “हम किसी अन्य चिकित्सा पद्धति का विरोध नहीं करते। हमारा उद्देश्य केवल इतना है कि सभी चिकित्सा पद्धतियों और उनके विधिवत पंजीकृत चिकित्सकों का सम्मान किया जाए। किसी भी पद्धति के चिकित्सक को बिना तथ्य एवं कानूनी आधार के ‘फर्जी’ या ‘झोलाछाप’ कहना उचित नहीं है।”

डॉ. साहू ने मीडिया, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, संस्थाओं और आम नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि चिकित्सा से जुड़े संवेदनशील विषयों पर अधूरी या अपुष्ट जानकारी के आधार पर टिप्पणी अथवा प्रचार-प्रसार न किया जाए। किसी चिकित्सक की योग्यता पर प्रश्न उठाने से पहले उसके पंजीयन और संबंधित कानूनी प्रावधानों की जानकारी लेना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि आयुर्वेद चिकित्सकों की वैधानिक स्थिति और उनके निर्धारित कार्यक्षेत्र को लेकर यदि किसी को कोई भ्रम है तो संबंधित राज्य चिकित्सा परिषद, सक्षम स्वास्थ्य विभाग अथवा NCISM से अधिकृत जानकारी प्राप्त की जानी चाहिए।

डॉ. प्रवीण कुमार साहू ने कहा कि चिकित्सा पद्धति अलग हो सकती है, लेकिन विधिवत शिक्षित एवं पंजीकृत चिकित्सक की पेशेवर गरिमा का सम्मान होना चाहिए। यही स्वस्थ चिकित्सा व्यवस्था और आम जनता के हित में भी आवश्यक है।

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