सरायपाली

नारी शक्ति का सम्मान: सरायपाली में विश्व महिला दिवस पर ‘शुभा सेवा संस्थान’ ने बिखेरी भव्यता की चमक

सरायपाली : “एक महिला का सशक्त होना, पूरे परिवार और समाज के भविष्य को सुरक्षित करना है।” इसी भावना के साथ अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस (08 मार्च 2026) के उपलक्ष्य में शुभा सेवा संस्थान द्वारा झिलमिला स्थित शुभा नर्सिंग होम में एक भव्य सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में क्षेत्र की उन महिलाओं को मंच दिया गया जिन्होंने जमीनी स्तर पर समाज सेवा और विकास की नई इबारत लिखी है।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि श्रीमती सरला कोसरिया (सदस्य, छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग एवं प्रदेश प्रभारी, भाजपा महिला मोर्चा) ने अपने संबोधन में कहा कि आज की नारी अब केवल घर तक सीमित नहीं है, वह शासन-प्रशासन से लेकर समाज की नीति निर्धारण में मुख्य भूमिका निभा रही है। विशिष्ट अतिथि कुमारी भास्कर (सभापति, जिला पंचायत महासमुंद) ने महिला जन प्रतिनिधियों के संघर्ष और उनकी सफलता की सराहना की।

अध्यक्षीय उद्बोधन में साहित्य और अधिकारों की गूंज

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं साहित्यकार एवं व्यायाम शिक्षिका डॉ. सुभ्रा डडसेना ने महिलाओं को उनके संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक किया। उन्होंने साहित्य और शिक्षा के माध्यम से महिला सशक्तिकरण पर जोर देते हुए बताया कि कैसे एक शिक्षिका और साहित्यकार के रूप में वे समाज को नई दिशा देने का प्रयास कर रही हैं।

आयोजक डॉ. सुजाता पटेल एवं डॉ. भागेश्वर पटेल ने अतिथियों के साथ मिलकर समाज के विभिन्न स्तंभों को सम्मानित किया, जिनमें शामिल थे:

प्रशासन एवं सुरक्षा: पुलिस विभाग की महिला कर्मी।

स्वास्थ्य सेवा: चिकित्सा क्षेत्र की विशेषज्ञ, मितानिन और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता।

नेतृत्व: महिला सरपंच, पार्षद और स्व-सहायता समूहों की ऊर्जावान सदस्य।

शिक्षा एवं समाज: समर्पित शिक्षिकाएं और निस्वार्थ भाव से कार्य करने वाली समाज सेविकाएं।

शुभा सेवा संस्थान की संचालिका डॉ. सुजाता पटेल ने कार्यक्रम के अंत में भावुक होते हुए कहा कि, “शुभा नर्सिंग होम केवल इलाज का केंद्र नहीं, बल्कि महिलाओं की मुस्कान और उनके सम्मान का साक्षी भी बनना चाहता है।” डॉ. भागेश्वर पटेल ने सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त किया और विश्वास दिलाया कि संस्थान भविष्य में भी ग्रामीण महिलाओं के स्वास्थ्य और स्वावलंबन के लिए कार्य करता रहेगा।

इस गरिमामयी समारोह में झिलमिला और सरायपाली क्षेत्र की सैकड़ों महिलाओं की उपस्थिति ने कार्यक्रम को ऐतिहासिक बना दिया।

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