
महासमुंद/सरायपाली। मरीजों की जिंदगी और स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में अस्पतालों की व्यवस्था कितनी गंभीरता से संचालित हो रही है, इसका एक चिंताजनक उदाहरण ओम हॉस्पिटल सरायपाली के स्वास्थ्य विभाग द्वारा किए गए आकस्मिक निरीक्षण में सामने आया है। 10 सितंबर 2026 को किए गए निरीक्षण के बाद मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, महासमुंद द्वारा जारी रिपोर्ट में अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर एक के बाद एक कई गंभीर बिंदु दर्ज किए गए हैं।
सरकारी निरीक्षण रिपोर्ट सामने आने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि स्वास्थ्य विभाग के निरीक्षण में इतनी कमियां सामने आ सकती हैं, तो अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीजों की सुरक्षा व्यवस्था कितनी पुख्ता है?
नर्सिंग स्टाफ की योग्यता और पंजीयन पर सवाल
निरीक्षण रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि अस्पताल में पदस्थ स्टाफ नर्स गिरिजा साहू के छत्तीसगढ़ नर्सिंग काउंसिल की वैधता समाप्त हो चुकी है। वहीं दीपांजली गहने का छत्तीसगढ़ नर्सिंग काउंसिल में पंजीयन नहीं पाया गया, जबकि उनका पंजीयन ओडिशा में होना बताया गया है।
ऐसे में सवाल उठता है कि मरीजों की देखभाल जैसी संवेदनशील जिम्मेदारी संभालने वाले स्टाफ की वैधता और पंजीयन की जांच अस्पताल प्रबंधन द्वारा पहले क्यों नहीं की गई?

CT Scan व्यवस्था ने बढ़ाई चिंता
निरीक्षण रिपोर्ट में CT Scan व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल खड़े किए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार CT Scan की रिपोर्ट के लिए डॉक्टर के साथ MOU नहीं पाया गया।
इतना ही नहीं, रिपोर्ट में CT Scan मशीन के अनधिकृत व्यक्ति द्वारा संचालित किए जाने की बात भी दर्ज है। मशीन के रजिस्ट्रेशन से संबंधित दस्तावेज भी निरीक्षण के दौरान संबंधित कार्यालय में उपलब्ध नहीं कराए गए।
यह मामला इसलिए गंभीर है क्योंकि CT Scan जैसी जांच की रिपोर्ट मरीज के इलाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि मशीन कौन चला रहा था, उसकी तकनीकी योग्यता क्या थी और जांच रिपोर्ट की जिम्मेदारी आखिर किसकी थी?
अधिक राशि वसूली की शिकायत, Payment Receipt Book तक नहीं मिली
निरीक्षण रिपोर्ट में सबसे महत्वपूर्ण बिंदुओं में से एक CT Scan जांच एवं रिपोर्ट के लिए अधिक राशि वसूलने की शिकायत से संबंधित है। रिपोर्ट के अनुसार निरीक्षण के दौरान Payment Receipt Book प्रस्तुत नहीं की गई।
अब सवाल यह है कि जब अधिक राशि वसूलने की शिकायत पहले से सामने थी, तो भुगतान से संबंधित रिकॉर्ड निरीक्षण के समय क्यों प्रस्तुत नहीं किया गया?
क्या अस्पताल में CT Scan की दरें निर्धारित नियमों के अनुसार ली जा रही थीं?
क्या प्रत्येक मरीज को विधिवत रसीद दी जा रही थी?
और यदि सब कुछ नियमों के अनुसार था तो Payment Receipt Book प्रस्तुत करने में क्या परेशानी थी?
ICU में डॉक्टर नहीं मिला—तो मरीजों की जिम्मेदारी किसकी?
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट का सबसे गंभीर बिंदु ICU से जुड़ा दिखाई देता है। रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से दर्ज है कि निरीक्षण के दौरान ICU में कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था।
रिपोर्ट में डॉ. त्रिलोक नेताम, MD को ऑन-कॉल दर्शाए जाने तथा उन्हें शासकीय चिकित्सक बताए जाने का भी उल्लेख है।
अब सवाल यह है कि ICU में भर्ती गंभीर मरीजों के समय तत्काल चिकित्सकीय निगरानी की व्यवस्था क्या थी? अगर निरीक्षण के समय ICU में डॉक्टर मौजूद नहीं था, तो आपात स्थिति में मरीजों की चिकित्सा जिम्मेदारी कौन संभाल रहा था?
अब स्वास्थ्य विभाग के सामने असली परीक्षा
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने निरीक्षण में सामने आए बिंदुओं पर अस्पताल प्रबंधन से तीन दिवस के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है। रिपोर्ट जिला कलेक्टर महासमुंद को भी आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई है।
अब निगाहें स्वास्थ्य विभाग की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। क्या केवल स्पष्टीकरण लेकर मामला खत्म होगा या निरीक्षण में सामने आई कमियों की गंभीरता को देखते हुए नियमानुसार ठोस कार्रवाई भी होगी?
मरीजों के स्वास्थ्य और जीवन से जुड़े मामले में सिर्फ कागजी खानापूर्ति नहीं, बल्कि जवाबदेही और कार्रवाई जरूरी है। सरकारी निरीक्षण रिपोर्ट में दर्ज बिंदुओं का अस्पताल प्रबंधन को स्पष्ट जवाब देना होगा कि आखिर ये कमियां कैसे सामने आईं और इन्हें दूर करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।
बड़ा सवाल!
अगर स्वास्थ्य विभाग के आकस्मिक निरीक्षण में इतनी कमियां सामने आईं, तो नियमित रूप से अस्पताल की निगरानी और नर्सिंग होम एक्ट के प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
अब देखना यह है कि स्वास्थ्य विभाग इस रिपोर्ट को सिर्फ फाइलों तक सीमित रखता है या मरीजों की सुरक्षा के लिए वास्तविक कार्रवाई करता है।



