महासमुंदसरायपाली

पालक-शिक्षक मेगा बैठक: बच्चों के विकास हेतु महत्वपूर्ण पहल

सरायपाली: लोक शिक्षण संचालनालय रायपुर तथा जिला परियोजना कार्यालय महासमुंद के निर्देशानुसार विकासखंड सरायपाली के समस्त विद्यालयों में जिला शिक्षा अधिकारी मोहन राव सावंत, जिला मिशन समन्वयक महासमुंद कमल नारायण चंद्राकर के निर्देशन एवं विकासखंड शिक्षा अधिकारी प्रकाश चंद्र मांझी, सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी डी एन दीवान,विकासखंड स्त्रोत केंद्र समन्वयक(समग्र शिक्षा) सतीश स्वरूप पटेल के मार्गदर्शन में *तृतीय पालक-शिक्षक मेगा बैठक* का सफल आयोजन किया गया। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य बच्चों के शैक्षणिक एवं व्यक्तिगत विकास को सुनिश्चित करना तथा पालकों को विद्यालय की गतिविधियों से जोड़ना था। बैठक में शैक्षिक परिणाम, बच्चों की कमजोरियों और उनके सुधार की दिशा में आवश्यक चर्चा की गई।

बैठक की शुरुआत प्रधान पाठकों एवं शिक्षकों द्वारा पालकों के स्वागत के साथ की गई। बच्चों के अर्धवार्षिक परीक्षा परिणामों को साझा करना, उनकी शैक्षिक प्रगति पर चर्चा करना और कमजोर बच्चों के लिए सुधारात्मक उपाय सुझाना बैठक का मुख्य उद्देश्य था। उच्च कार्यालय के निर्देशानुसार, यह सुनिश्चित किया गया कि सभी पालकों को बच्चों की शिक्षा और उनके समग्र विकास के लिए एक सक्रिय भूमिका निभाने का महत्व समझाया जाए।

बैठक में बच्चों के अर्धवार्षिक परीक्षा परिणाम प्रस्तुत किए गए। बच्चों के प्रदर्शन का विश्लेषण करते हुए शिक्षकों ने कमजोर बच्चों के लिए विशेष रूप से चिन्हित क्षेत्रों पर चर्चा की। इस दौरान पालकों को सुझाव दिया गया कि वे घर पर बच्चों की पढ़ाई में कैसे मदद कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, कमजोर विषयों में अतिरिक्त अभ्यास करवाना, बच्चों के पढ़ने-लिखने की आदतों को सुधारना, और उनके लिए एक नियमित पढ़ाई का समय सुनिश्चित करना।

शिक्षकों ने बच्चों के कमजोर क्षेत्रों को चिन्हित करने के लिए विभिन्न गतिविधियों और प्रगति सूचकांकों का उपयोग किया। पालकों को बच्चों के प्रदर्शन में सुधार लाने के लिए निम्नलिखित सुझाव दिए गए:

नियमित अभ्यास: बच्चों के लिए एक समय-सारणी बनाकर उनका नियमित अध्ययन सुनिश्चित करें।

घर पर पढ़ाई का माहौल: घर में पढ़ाई के लिए एक शांत और सुविधाजनक स्थान उपलब्ध कराएं।

कहानियां सुनाने और पढ़ने की आदत: इससे बच्चों की भाषा दक्षता और समझ में सुधार होता है।

शिक्षकों से संवाद: बच्चों की प्रगति पर नियमित रूप से शिक्षकों से चर्चा करें।

बैठक के दौरान नई शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत FLN (मूलभूत साक्षरता और संख्या ज्ञान) से जुड़ी दक्षताओं पर भी चर्चा की गई। पालकों को FLN के महत्व को समझाया गया और यह बताया गया कि प्रारंभिक शिक्षा में इन दक्षताओं का विकास कितना आवश्यक है। पालकों को यह भी बताया गया कि कैसे वे बच्चों को भाषा और गणित में दक्षता विकसित करने में मदद कर सकते हैं।

विद्यालयों में विद्यार्थियों के समग्र विकास को मापने के लिए तैयार किए गए विद्यार्थी विकास सूचकांक को भी बैठक में प्रस्तुत किया गया। शिक्षकों ने विद्यार्थियों के प्रदर्शन को विभिन्न मानकों पर मापा और उसके परिणामों को पालकों के समक्ष रखा। पालकों से इन परिणामों की सत्यता की पुष्टि कराई गई और यह सुनिश्चित किया गया कि वे बच्चों की प्रगति में सुधार के लिए विद्यालय का सहयोग करें।

बैठक के दौरान विशेष रूप से माताओं की सहभागिता सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। यह समझाया गया कि बच्चों के विकास में माताओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। माताओं को उनके बच्चों के दैनिक अध्ययन कार्यक्रम में शामिल होने और उनके भावनात्मक व शैक्षिक विकास में योगदान देने का आग्रह किया गया।

उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पूर्व व्यवसायिक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए इस बैठक में एक विशेष सत्र का आयोजन किया गया। इसमें स्थानीय कलाकारों और कारीगरों को आमंत्रित किया गया, जिन्होंने बच्चों और पालकों को अपने कौशल और अनुभव से अवगत कराया। यह पहल बच्चों को पारंपरिक और स्थानीय कारीगरी के प्रति प्रेरित करने के लिए की गई ताकि उनमें रचनात्मकता और व्यावसायिक कौशल विकसित हो सके।

बैठक में पालकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपने विचार साझा किए। उन्होंने विद्यालय द्वारा की जा रही पहलों की सराहना की और बच्चों की प्रगति में सक्रिय योगदान देने का आश्वासन दिया। पालकों ने सुझाव दिया कि बच्चों के पढ़ाई के साथ-साथ उनकी मानसिक और शारीरिक सेहत पर भी ध्यान दिया जाए।

इस मेगा बैठक के माध्यम से पालकों और शिक्षकों के बीच एक मजबूत संवाद स्थापित हुआ। बच्चों के शैक्षिक प्रदर्शन में सुधार और उनके समग्र विकास को सुनिश्चित करने के लिए यह बैठक अत्यंत प्रभावी रही। पालकों ने बच्चों की प्रगति में सहयोग करने का संकल्प लिया और शिक्षकों ने भी बच्चों के लिए और बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने का वादा किया। साथ ही पलकों को अपार आईडी, प्री बोर्ड परीक्षा, परीक्षा पर चर्चा,बच्चों के गुणवत्ता सुधार हेतु विस्तार पूर्वक जानकारी देते हुए कमजोर क्षेत्रों का चिंहांकन कर चर्चा की गई।

इस तरह की पहल न केवल बच्चों के प्रदर्शन को सुधारने में मददगार साबित होती है, बल्कि समाज में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी सहायक होती है।

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