


सरायपाली: हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी सरायपाली नगर हजारों की तादाद मे शंकर मुड़ा तालाब एवं झिलमिला में छठ पूजा बहुत ही धूमधाम से मनाया गया। छठ महापर्व चार दिवसीय पर्व होता है,जिसमें प्रथम दिवस मंगलवार को नहाय खाय के साथ शुरू हो गया।जिसमें महिलाएं नहाखाय द्वितीय दिवस में खरना, इसके अलावा तृतीय एवं चतुर्थ दिवस में डूबते सूर्य एवं उगते सूर्य की उपासना की जाती है। सबसे पहले सूर्य भगवान को जल अर्पण करने के बाद प्रसाद में लौकी की सब्जी और चावल-दाल ग्रहण किए। चार दिवसीय इस पूजा पर्व के दूसरे दिन बुधवार को खरना करते है , यानी नमक नहीं खाएंगे और घर-घर ठेकुआ का प्रसाद बनता है । 7 नवंबर सुबह से 36 घंटे का निर्जला व्रत रखकर महिलाये छठी मइया की आराधना में जाती है । पहला अर्घ्य ढलते होते सूर्य को और दूसरा अर्घ्य उगते सूर्यदेव को अर्पित कर उपवास खोला जाता है ।और छठ महापर्व को विश्व का सबसे कठिनतम व्रत माना जाता है और इसमें पुरुष भी भारी संख्याओं में सम्मिलित होते है।छठ महापर्व में महिलाएं संतान की प्राप्ति और परिवार की सुख शांति समृद्धि के लिए सूर्य देव की उपासना करती हैं। विभिन्न स्थानों मे हुवे छठ महापर्व के आयोजन मे आम नागरिकों एवं पुलिस प्रशासन का विशेष सहयोग रहा।





