महासमुंदसरायपाली

मौत का पॉइंट बनता जा रहा ‘शिशुपाल पर्वत’, प्रेमी जोड़े ने पहाड़ी से कूदकर दी जान; 5 साल में 15 जिंदगियां तबाह

सरायपाली (महासमुंद)। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले का प्रसिद्ध पर्यटन स्थल ‘शिशुपाल पर्वत’ एक बार फिर चीख उठा है। अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए पहचाना जाने वाला यह पहाड़ अब ‘सुसाइड पॉइंट’ और ‘डेथ वैली’ के रूप में कुख्यात होता जा रहा है। ताजा मामले में एक प्रेमी जोड़े ने पहाड़ की ऊंचाई से छलांग लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली, जिससे पूरे इलाके में मातम और दहशत का माहौल है।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, सांकरा थाना क्षेत्र के ग्राम बारीकपाली निवासी डिलेश्वर साव और एक नाबालिग युवती (कोमल) के शव शिशुपाल पर्वत की तलहटी में संदिग्ध अवस्था में मिले। बताया जा रहा है कि दोनों के बीच संभवत: लंबे समय से प्रेम-प्रसंग चल रहा होगा । संभवतः सामाजिक या पारिवारिक दबाव के चलते दोनों ने पहाड़ से कूदकर आत्मघाती कदम उठाया। सूचना मिलते ही पुलिस बल मौके पर पहुंचा और कड़ी मशक्कत के बाद शवों को नीचे उतारकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
5 साल का खौफनाक रिकॉर्ड: 15 मौतें
शिशुपाल पर्वत पर सुरक्षा के दावों की पोल इस आंकड़े ने खोल दी है। पिछले 5 वर्षों में यहाँ अलग-अलग घटनाओं में लगभग 15 लोगों की जान जा चुकी है। मौत के इन मामलों में तीन प्रमुख कारण सामने आए है
जानलेवा सेल्फी: ऊंचाइयों पर खतरनाक सेल्फी लेने के चक्कर में अब तक कई युवा अपना संतुलन खोकर गहरी खाई में गिर चुके हैं।
आत्महत्या: एकांत और ऊंचाई के कारण यह स्थान आत्महत्या करने वालों की पहली पसंद बनता जा रहा है।
संदिग्ध हत्याएं: कुछ मामलों में हत्या कर शव को पहाड़ से नीचे फेंकने की आशंका भी जताई गई है, जिनकी जांच अब भी फाइलों में दबी है।
प्रशासनिक लापरवाही और सुरक्षा का अभाव
हजारों फीट की ऊंचाई और खतरनाक रास्तों के बावजूद शिशुपाल पर्वत पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं।
    • फेंसिंग की कमी: खतरनाक पॉइंट्स पर कोई रेलिंग या जाली (Fencing) नहीं लगाई गई है।
    • चेतावनी बोर्ड नदारद: पर्यटकों को जागरूक करने के लिए पर्याप्त संकेतकों और चेतावनी बोर्डों का अभाव है।
    • पुलिस पेट्रोलिंग का अभाव: पर्यटन सीजन और छुट्टियों के दौरान भारी भीड़ उमड़ने के बावजूद यहां सुरक्षा गार्डों या पुलिस की तैनाती नहीं रहती।


स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार हो रहे हादसों के बाद भी प्रशासन गहरी नींद में है। पर्यटन के नाम पर इसे विकसित तो किया जा रहा है, लेकिन इंसानी जान की सुरक्षा को ताक पर रख दिया गया है। लोगों ने मांग की है कि पहाड़ के संवेदनशील हिस्सों की घेराबंदी की जाए और वहां जाने वाले रास्तों पर सख्त निगरानी रखी जाए।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

BREAKING