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संघर्षशील जीवन और समाज परिवर्तन की मिसाल : फुलझर के प्रथम साम्यवादी विचारक कॉमरेड लोकनाथ पात्रो की 35वीं पुण्यतिथि आज

महासमुंद/सरायपाली : फुलझर अंचल की वैचारिक, सामाजिक और राजनीतिक चेतना के इतिहास में कॉमरेड लोकनाथ बी. पात्रो का नाम अत्यंत सम्मान और आदर के साथ लिया जाता है। वे केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि जनचेतना के अग्रदूत, प्रखर बुद्धिजीवी, समाज सुधारक तथा साम्यवादी विचारधारा के सशक्त प्रतिनिधि थे। उनकी ३५वीं पुण्यतिथि पर पूरा अंचल उन्हें श्रद्धापूर्वक स्मरण कर रहा है।

कॉमरेड लोकनाथ बी. पात्रो का जन्म २९ फरवरी १९३६ को तोषगाँव में हुआ था, जो उस समय रायपुर जिले, छत्तीसगढ़ डिवीजन, सेन्ट्रल प्रोविंस ऑफ बॅरार स्टेट के अंतर्गत आता था। उनके पिता स्वर्गीय बढ़ई पात्रो एक प्रतिष्ठित हैड मास्टर थे तथा माता स्वर्गीय सरस्वती पात्रो सुशिक्षित एवं संस्कारवान गृहणी थीं। परिवार में शिक्षा, अनुशासन और सामाजिक चेतना का वातावरण था, जिसने उनके व्यक्तित्व को गहराई से प्रभावित किया।

वे विद्यार्थी जीवन से ही अत्यंत मेधावी थे। प्रारंभिक शिक्षा मंदिर स्कूल सरायपाली में प्राप्त करने के पश्चात उन्होंने नागपुर के सेंट जेवियर्स स्कूल में अध्ययन किया। आगे की शिक्षा विक्टोरिया कॉलेज एवं संबलपुर यूनिवर्सिटी से ग्रहण कर वैचारिक ज्ञान अर्जित किया। उन्होंने स्नातक एवं विधि स्नातक की उपाधि प्राप्त की।

कॉमरेड पात्रो बहुभाषाविद् थे। हिंदी, अंग्रेजी, उड़िया, बांग्ला, उर्दू, डच सहित सात भाषाओं पर उनकी अद्भुत पकड़ थी। यही कारण था कि वे विभिन्न संस्कृतियों और विचारधाराओं का गहन अध्ययन कर सके। ज्योतिष एवं हस्तरेखा विज्ञान में भी उनकी विशेष रुचि और गहरी विशेषज्ञता थी, जिससे वे क्षेत्र में एक विद्वान व्यक्तित्व के रूप में पहचाने जाते थे।

उन्होंने साम्यवादी विचारधारा को केवल सिद्धांत तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे जनजीवन से जोड़ा। वे किसानों, मजदूरों, शोषितों और वंचित वर्गों की आवाज बने। सामाजिक समानता, शिक्षा, श्रमिक अधिकार और जनकल्याण उनके राजनीतिक जीवन के मूल आधार थे। सरायपाली विधानसभा क्षेत्र से वे अनेक बार विधायक पद के उम्मीदवार रहे। यद्यपि उन्हें चुनावी सफलता नहीं मिली, किंतु जनता के बीच उनकी लोकप्रियता, ईमानदारी और वैचारिक प्रतिबद्धता सदैव बनी रही।

उनकी अर्द्धांगिनी स्वर्गीय गुलाबी पात्रो ने जीवनभर उनके संघर्षों में साथ निभाया। परिवार में पाँच पुत्रियाँ एवं एक पुत्र हैं, जिन्होंने उनके संस्कारों और मूल्यों को आगे बढ़ाया।

२७ मई १९९१ को उनका निधन हुआ, किंतु उनके विचार, संघर्ष और जनसेवा आज भी फुलझर अंचल की स्मृतियों में जीवित हैं। वे उस पीढ़ी के प्रतिनिधि थे जिसने राजनीति को सत्ता नहीं, बल्कि समाज परिवर्तन का माध्यम माना।

कॉमरेड लोकनाथ बी. पात्रो की ३५वीं पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए यही कहा जा सकता है कि उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा, वैचारिक साहस और जनसेवा का उज्ज्वल उदाहरण है।

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