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सरायपाली के तोरेसिंघा कन्या मिडिल स्कूल में नियमों को ताक पर रख स्कूल समय में मनमानी, कलेक्टर जनदर्शन की शिकायत पर DEO ने बैठाई जांच टीम

महासमुंद/सरायपाली : छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में शिक्षा विभाग की व्यवस्थाओं और अनुशासन को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। सरायपाली स्थित शासकीय कन्या उच्च प्राथमिक शाला के प्रभारी प्रधानपाठक पर स्कूल संचालन के समय में स्वेच्छाचारिता और बिना अनुमति नियमों के उल्लंघन का आरोप लगा है। इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) महासमुंद ने दो सदस्यीय जांच टीम गठित कर 5 दिनों के भीतर रिपोर्ट तलब की है।

मामले का खुलासा तब हुआ जब सरायपाली के वार्ड नंबर 03, संजय नगर निवासी मनोज प्रधान ने जिला प्रशासन से शिकायत की। शिकायतकर्ता के अनुसार, शासकीय कन्या उच्च प्राथमिक शाला सरायपाली के प्रभारी प्रधानपाठक ओमप्रकाश छत्रपति विद्यालय के निर्धारित समय का पालन नहीं कर रहे हैं। आरोप है कि वे स्कूल के आधिकारिक समय के दौरान विद्यालय को बंद रखते हैं और विभाग से बिना किसी पूर्व अनुमति या आदेश के, अपनी मर्जी से प्रातः काल (मॉर्निंग शिफ्ट) में स्कूल का संचालन कर रहे हैं।

यह मामला कलेक्टर जनदर्शन में टोकन नंबर 2120226000306 के तहत दर्ज कराया गया था। जनदर्शन में प्राप्त शिकायतों पर त्वरित निराकरण के राज्य सरकार के निर्देशों के पालन में, छत्तीसगढ़ जन-शिकायत निवारण प्रणाली की सक्रियता के चलते इस पर तत्काल प्रशासनिक संज्ञान लिया गया है।

जिला शिक्षा अधिकारी का कड़ा रुख लिया शिकायत की गंभीरता को देखते हुए कार्यालय जिला शिक्षा अधिकारी महासमुंद ने आदेश क्रमांक 1015/सतर्कता/जांच/2026 जारी कर जांच के आदेश दिए हैं। विभाग ने इसे ‘सतर्कता’ (Vigilance) मामले के अंतर्गत रखा है, जो यह दर्शाता है कि प्रशासनिक अनुशासनहीनता को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

DEO कार्यालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार, जांच की जिम्मेदारी दो वरिष्ठ प्राचार्यों को सौंपी गई है:

1. दिलीप कुमार नायक (प्राचार्य, शासकीय कन्या उच्च माध्यमिक विद्यालय सरायपाली)

2. सहदेव प्रधान (प्राचार्य, शा.मा.स.गो. उच्च माध्यमिक विद्यालय सरायपाली)

जिला शिक्षा अधिकारी ने दोनों जांच अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों की जमीनी स्तर पर जांच करें। उन्हें यह स्पष्ट करना होगा कि क्या वास्तव में स्कूल संचालन के समय में बदलाव किया गया है और यदि हां, तो इसके लिए विभाग से अनुमति ली गई थी या नहीं। जांच अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे 05 दिवस के भीतर अपना प्रतिवेदन (रिपोर्ट) स्पष्ट अभिमत के साथ कार्यालय में प्रस्तुत करें।

यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो प्रभारी प्रधानपाठक के विरुद्ध छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। शासकीय नियमों के अनुसार, किसी भी विद्यालय के समय में परिवर्तन करने का अधिकार केवल राज्य शासन या सक्षम प्राधिकारी के पास होता है। बिना अनुमति ऐसा करना ‘कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही’ माना जाता है। स्थानीय अभिभावकों और ग्रामीणों की नजर अब जांच रिपोर्ट पर टिकी है। सरायपाली क्षेत्र में यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में इस तरह की मनमानी बच्चों के भविष्य और शासकीय अनुशासन पर क्या प्रभाव डालेगी।

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