नवीन महाविद्यालय अर्जुनी मे डॉ. पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी जयंती कार्यक्रम का सफल आयोजन

अर्जुनी : नवीन शासकीय महाविद्यालय अर्जुनी में प्राचार्य श्रीमती डॉ. अंजलि अवधिया के निर्देशन में दिनांक 26-05-026 को डॉ. पदुमलाल पन्नालाल बख्शी जयंती कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें कार्यक्रम का आरंभ बख्शी जी के छायाचित्र पर माल्यार्पण कर किया गया।

इसी दौरान छात्र -छात्राओं में काजल बीए द्वितीय सेमेस्टर, चंद्र प्रकाश साहू चतुर्थ सेमेस्टर, मुरली साहू चतुर्थ सेमेस्टर इत्यादि ने बख्शी जी जीवन परिचय और उनके साहित्यिक योगदान है पर प्रकाश डालें इसी प्रकार पोस्टर प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया जिसमें मुरली साहू बीए चतुर्थ सेमेस्टर, नेहा बीएससी चतुर्थ सेमेस्टर, मनी बीएससी चतुर्थ सेमेस्टर, रवीना बीकॉम द्वितीय सेमेस्टर, गीतांजलि बीए द्वितीय सेमेस्टर इत्यादियों ने भाग लिया जिसमें प्रथम क्रमांक मनी बीएससी चतुर्थ सेमेस्टर, द्वितीय नेहा बीएससी चतुर्थ सेमेस्टर, तथा तृतीय मुरली बीए चतुर्थ सेमेस्टर ने स्थान प्राप्त किया तत्पश्चात श्री तामेश्वर साहू जन भागीदारी अध्यक्ष द्वारा स्वागत भाषण प्रस्तुत किया गया इसी कड़ी में उपस्थित बक्शी जी के नाती श्री गजेंद्र बख्शी जी ने अपने दादाजी के महत्वपूर्ण रचनाओं पर प्रकाश डालते हुए, कहा बख्शी जी सरल स्वभाव एवं बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे उनकी रचनाओं में नई सोच के साथ अच्छे कार्य करने का संकल्प मिलता है वे गुरु के भांति रचनाओं का सृजन कर नया संदेश देती थी इसीलिए सभी जनमानस उन्हें मास्टर के नाम से पुकारा करते थे इसी कड़ी में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित कृष्ण कुमार द्विवेदी वरिष्ठ प्राध्यापक कमला देवी राठी महाविद्यालय राजनांदगांव द्वारा बख्शी जी के जीवन इतिहास और साहित्य के रचनाओं पर विस्तार से प्रकार डालते हुए कहा साहित्य समाज का दर्पण होता है जिसमें लोगों का प्रतिबिंब छुपा हुआ होता है इस प्रतिबिंब को महान साहित्यकार अपनी रचनाओं के माध्यम से उकेर कर साहित्य सृजन की अमित छाप को छोड़ देता है इसी में बख्शी जी ने झलमला, कारी और क्या लिखूं जैसे साहित्य आम जिंदगी की रेखा को प्रस्तुत किया है जो कारी नामक रचना से प्रभावित होकर रामचंद्र देशमुख ने भी इस रचना पर कार्य किया इस प्रकार साहित्य समाज का दर्पण बनकर उसका प्रतिबिंब लोगों में झलकता है और समाज देश में विस्तृत हो जाता है इसीलिए साहित्यकारों की रचनाओं पर अध्ययन करना चाहिए अंतिम कड़ी में प्राचार्य द्वारा बख्शी जी के साहित्य को अनमोल रतन कहते हुए उनके रचनाओं पर शोध अनुसंधान करने की बातें कहकर छात्रों को डायरी लेखन हेतु प्रेरित किया तथा अपने जीवन काल में साहित्य में रुचि रखकर साहित्यिक रचनाओं में अपना योगदान देने की बात कहीं जिससे साहित्यिक धरोहर की रंगमंच का लोकार्पण होता है इस अवसर पर कला, वाणिज्य और विज्ञान के समक्ष छात्र छात्राएं उपस्थित रहे तथा अतिथि व्याख्याता में श्रीमती डॉ. संजू सिंह, श्रीमती डॉ. काव्य जैन, श्रीमती डॉ हेमलता विरदी, कंचन साहू, हिमानी साहू, चांदनी पराते, संध्या गावरे, योगिता ठाकुर श्री ज्ञानेश्वर देवांगन, मनोज प्रधान, खेलन साहू, चंद्रकांत कुंभकार तथा जनप्रतिनिधियों में सरपंच ललिता साहू, जन भागीदारी सदस्य श्रीमती ललिता टांडेकर, श्री चानू राम साहू इत्यादि उपस्थित रहे कार्यक्रम का संचालन हिंदी विभागाध्यक्ष श्री ओम प्रकाश सहारे तथा आभार प्रदर्शन वाणिज्य विभाग शिक्षिका कु.शुभि जैन द्वारा किया गया।





